Supreme Court Decision : दिल्ली की हवा साल दर साल खराब होती जा रही है और इसे सुधारने के लिए सरकार और अदालतें लगातार प्रयास कर रही हैं। राजधानी में सांस लेना मुश्किल हो गया है, खासकर सर्दियों के महीनों में जब धुंध और धुआं मिलकर पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेते हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है जो दिल्ली और आसपास के इलाकों में चलने वाले पुराने वाहनों से जुड़ा है। यह फैसला लाखों गाड़ी मालिकों को प्रभावित करने वाला है और इसे समझना बेहद जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक पुराने आदेश में बदलाव किया है। इस नए फैसले में साफ किया गया है कि किन गाड़ियों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत मिलेगी और किन्हें रोका जाएगा। अदालत ने अपने पहले के आदेश में कुछ ढील दी थी, लेकिन अब दिल्ली सरकार के अनुरोध पर उस ढील को वापस ले लिया गया है। अब फैसला साफ है कि जो गाड़ियां बीएस-तीन या उससे भी पुराने प्रदूषण मानकों की हैं, उन्हें दिल्ली और आसपास के इलाकों में नहीं चलाया जा सकता। हालांकि, जो गाड़ियां बीएस-चार या उससे नए मानकों की हैं, उन्हें कुछ राहत मिली है।
बीएस मानक क्या होते हैं और क्यों जरूरी हैं
बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आता कि यह बीएस-तीन और बीएस-चार क्या चीज है। दरअसल बीएस का मतलब है भारत स्टेज, जो कि प्रदूषण नियंत्रण का एक मानक है। यह बताता है कि किसी गाड़ी का इंजन कितना धुआं और जहरीली गैसें हवा में छोड़ता है। जैसे-जैसे संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे प्रदूषण कम होता जाता है। बीएस-तीन वाली गाड़ियां काफी ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं जबकि बीएस-चार वाली गाड़ियां थोड़ी बेहतर हैं। आजकल तो बीएस-छह मानक भी आ चुके हैं जो सबसे साफ माने जाते हैं। पुरानी गाड़ियों में आधुनिक तकनीक नहीं होती जो प्रदूषण को कम कर सके, इसलिए सरकार और अदालतें इन्हें सड़क से हटाना चाहते हैं।
किन गाड़ियों पर लगा है प्रतिबंध
अब सवाल यह उठता है कि आखिर किन गाड़ियों पर रोक लगी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में वे सभी गाड़ियां नहीं चल सकतीं जो बीएस-तीन या उससे पुराने मानकों की हैं। इसके अलावा डीजल से चलने वाली गाड़ियां अगर दस साल से ज्यादा पुरानी हैं तो उन पर भी प्रतिबंध है। वहीं पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के मामले में पंद्रह साल की उम्र सीमा तय की गई है। मतलब अगर आपकी डीजल कार दस साल पुरानी है और बीएस-तीन मानक की है तो वह दिल्ली में नहीं चल सकती। इसी तरह अगर आपकी पेट्रोल कार पंद्रह साल से ज्यादा पुरानी है और पुराने प्रदूषण मानकों की है तो उसे भी सड़क पर नहीं उतारा जा सकता।
किन गाड़ियों को मिली राहत
इस फैसले में एक बड़ी राहत की बात भी है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर आपकी गाड़ी बीएस-चार या उससे नए मानकों की है, तो केवल उम्र के आधार पर आप पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। मतलब अगर आपकी बीएस-चार डीजल कार दस साल से ज्यादा पुरानी भी है, तो भी आप उसे चला सकते हैं। यही नियम बीएस-चार पेट्रोल कारों के लिए भी लागू होता है चाहे वे पंद्रह साल से ज्यादा पुरानी हों। यह राहत बहुत जरूरी थी क्योंकि बीएस-चार गाड़ियां अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाती हैं और इन्हें बंद करना गाड़ी मालिकों के साथ अन्याय होता। लाखों लोगों ने अच्छी कीमत देकर ये गाड़ियां खरीदी हैं और अगर इन्हें चलाने पर रोक लगती तो उनका बहुत नुकसान होता।
पहले क्या था और अब क्या बदला
यह पहली बार नहीं है जब पुराने वाहनों पर रोक की बात हो रही है। साल दो हजार पंद्रह में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने पहली बार कहा था कि दिल्ली में पुराने वाहनों को नहीं चलने देना चाहिए। तब से लेकर अब तक कई बार इस मुद्दे पर अदालतों में सुनवाई हुई है। दो हजार अठारह में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी थी। लेकिन समस्या यह थी कि इन आदेशों को ठीक से लागू नहीं किया गया। लोग पुरानी गाड़ियां चलाते रहे और सरकारी अधिकारी ठीक से जांच नहीं कर पाए। अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से कहा है कि इन नियमों को लागू किया जाए और जो गाड़ियां प्रदूषण फैला रही हैं उन्हें सड़क से हटाया जाए।
पेट्रोल पंप वाला आदेश और उसका विरोध
कुछ महीने पहले दिल्ली सरकार ने एक और सख्त कदम उठाने की कोशिश की थी। सरकार ने कहा था कि जुलाई महीने से पेट्रोल पंपों पर पुरानी गाड़ियों को तेल नहीं दिया जाएगा। यह आदेश बहुत सख्त था क्योंकि इसका मतलब था कि पुरानी गाड़ियां बिल्कुल बेकार हो जातीं। लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया क्योंकि लाखों लोगों के पास पुरानी गाड़ियां हैं और उन्हें नई गाड़ी खरीदने के लिए मजबूर करना उनके साथ नाइंसाफी है। जनता के दबाव में सरकार को यह आदेश वापस लेना पड़ा। फिर सरकार ने अदालत से गुजारिश की कि कुछ ऐसा किया जाए जो सही और न्यायसंगत हो। इसी के नतीजे में अदालत ने यह नया फैसला सुनाया है जो थोड़ा संतुलित है।
गाड़ी मालिकों को क्या करना चाहिए
अगर आपके पास भी पुरानी गाड़ी है तो आपको सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि वह किस बीएस मानक की है। यह जानकारी आपकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन कागजों में मिल जाएगी। अगर आपकी गाड़ी बीएस-तीन या उससे पुरानी है तो आपको अब उसे दिल्ली में नहीं चलाना चाहिए क्योंकि इस पर जुर्माना लग सकता है। आप चाहें तो उस गाड़ी को किसी दूसरे शहर में बेच सकते हैं जहां ऐसी रोक नहीं है। या फिर आप उसे स्क्रैप करवा सकते हैं जिसके लिए सरकार कुछ पैसे भी देती है। अगर आपकी गाड़ी बीएस-चार या नई है तो आप निश्चिंत रहें, आपकी गाड़ी चल सकती है। लेकिन ध्यान रखें कि समय-समय पर प्रदूषण जांच जरूर करवाएं ताकि आपकी गाड़ी से ज्यादा धुआं न निकले।
भविष्य में क्या हो सकता है
यह फैसला एक शुरुआत है और आने वाले समय में और सख्त नियम आ सकते हैं। दिल्ली का प्रदूषण इतना गंभीर हो चुका है कि सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। संभव है कि आने वाले सालों में बीएस-चार गाड़ियों पर भी कुछ रोक लगे और केवल बीएस-छह गाड़ियों को ही चलाने की इजाजत हो। इसलिए अगर आप नई गाड़ी खरीद रहे हैं तो ध्यान रखें कि वह नवीनतम प्रदूषण मानकों की हो। साथ ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भी विचार करना चाहिए क्योंकि वे बिल्कुल प्रदूषण नहीं फैलातीं। सरकार भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा दे रही है और इन पर कई तरह की छूट दे रही है। अंत में यही कहा जा सकता है कि साफ हवा में सांस लेना हर किसी का हक है और इसके लिए हमें कुछ बदलाव स्वीकार करने होंगे।
