Shramik Pension Yojana :- छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने राज्य में रहने वाले उन मेहनतकश मजदूरों के लिए एक खास योजना बनाई है जो दिन-रात मेहनत करके इमारतें खड़ी करते हैं। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन सहायता योजना के नाम से शुरू की गई यह पहल मार्च 2023 से लागू हो चुकी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्ग मजदूरों को आर्थिक मदद देना है जो उम्र के इस पड़ाव पर आकर काम करने लायक नहीं रह जाते। श्रम विभाग इस योजना को चला रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि जरूरतमंद मजदूरों तक इसका लाभ पहुंचे। यह कदम उन लोगों के लिए आशा की किरण लेकर आया है जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और जिनकी कोई निश्चित आमदनी नहीं होती।
हर महीने कितनी मिलती है पेंशन
इस योजना के अंतर्गत पात्र निर्माण मजदूरों को हर महीने पंद्रह सौ रुपये की पेंशन दी जाती है। यह रकम भले ही बहुत बड़ी न लगे लेकिन बुजुर्ग मजदूरों के लिए यह बहुत मायने रखती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचती है जिससे किसी बिचौलिए की गुंजाइश नहीं रहती। योजना में एक और खास प्रावधान है जो परिवारों के लिए राहत भरा है। अगर किसी पेंशन पाने वाले मजदूर की मृत्यु हो जाती है तो उसकी विधवा पत्नी को सात सौ रुपये प्रति माह पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलती रहती है। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि मजदूर की मृत्यु के बाद उसका परिवार पूरी तरह असहाय न हो जाए।
कौन-कौन इस योजना के हकदार हैं
इस योजना का फायदा हर किसी को नहीं मिलता बल्कि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि मजदूर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत होना चाहिए। दूसरी जरूरी बात यह है कि उसकी उम्र साठ साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए। अगर पति-पत्नी दोनों ही मजदूर हैं और दोनों पंजीकृत हैं तो दोनों को अलग-अलग पेंशन मिल सकती है। लेकिन अगर किसी एक की मृत्यु हो जाती है तो जीवित साथी को ही पेंशन मिलती रहेगी। एक खास बात यह है कि अगर विधवा महिला की उम्र साठ साल से कम है तो उसे पारिवारिक पेंशन मिलती है और जब वह साठ साल की हो जाती है तो मुख्य पेंशन के लिए पात्र हो जाती है।
जीवित होने का सबूत देना जरूरी
योजना को सही तरीके से चलाने और धोखाधड़ी से बचाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण नियम बनाया है। हर साल मार्च के महीने में सभी पेंशन पाने वाले मजदूरों को अपना जीवित प्रमाण पत्र श्रम विभाग के दफ्तर में जमा करना अनिवार्य है। यह एक तरह का सबूत है कि पेंशन लेने वाला व्यक्ति अभी जीवित है। अगर तय समय में यह प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता तो पेंशन रोक दी जाती है। हालांकि यह रोक अस्थायी होती है और जैसे ही प्रमाण पत्र जमा कर दिया जाता है पेंशन फिर से शुरू हो जाती है। पहली बार जब पेंशन के लिए आवेदन किया जाता है तब भी यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है ताकि यह पक्का हो सके कि आवेदक वास्तव में पात्र है।
आवेदन कैसे करें
इस योजना के लिए आवेदन करने का तरीका बहुत सरल रखा गया है हालांकि यह पूरी तरह ऑफलाइन है। जो मजदूर पेंशन लेना चाहता है उसे सबसे पहले छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा और वहां से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करना होगा। इस फॉर्म को ध्यान से भरना चाहिए और सभी जानकारी सही-सही देनी चाहिए। फॉर्म भरने के बाद इसे जरूरी कागजातों के साथ नजदीकी श्रम कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन के समय कई दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है जैसे कि मंडल में पंजीकरण का प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक जिसमें खाता नंबर हो, उम्र का प्रमाण और हाल की खिंचवाई गई फोटो। अगर कोई विधवा महिला पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर रही है तो उसे अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी देना होगा।
निर्माण मजदूरों की कठिन जिंदगी
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की जिंदगी बहुत कठिन होती है। वे धूप, बारिश, सर्दी हर मौसम में काम करते हैं। भारी सामान उठाना, ऊंची इमारतों पर चढ़ना, घंटों खड़े रहकर काम करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। इस कड़ी मेहनत से उनका शरीर जल्दी टूट जाता है। जब वे बूढ़े हो जाते हैं तो काम करने की ताकत नहीं रहती। फिर उनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं रहता। ऐसे में पेंशन उनके लिए जीवनरेखा की तरह है। यह रकम भले ही कम हो लेकिन कम से कम उन्हें दो वक्त की रोटी तो मिल सकती है।
परिवारों को मिलता है सहारा
जब किसी मजदूर की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। खासकर अगर घर में बुजुर्ग पत्नी है और कोई कमाने वाला नहीं है तो हालत और भी बुरी हो जाती है। इस योजना में पारिवारिक पेंशन का प्रावधान ऐसे परिवारों के लिए बहुत राहत देता है। सात सौ रुपये भले ही ज्यादा न हों लेकिन यह सुनिश्चित करते हैं कि विधवा को कम से कम खाने के लिए कुछ तो मिल सके। यह योजना यह संदेश देती है कि सरकार अपने मजदूरों को नहीं भूलती और उनके परिवारों का भी ख्याल रखती है।
सम्मान और आत्मनिर्भरता
यह योजना केवल पैसे देने तक सीमित नहीं है बल्कि यह मजदूरों को सम्मान भी देती है। जो लोग पूरी जिंदगी समाज के लिए इमारतें बनाते रहे, उन्हें बुढ़ापे में भीख नहीं मांगनी पड़ती। उनके पास अपनी पेंशन है जिससे वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है और समाज में सिर उठाकर जीने का हक देता है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए यह योजना एक बड़ा कदम है क्योंकि उनके पास न तो भविष्य निधि होती है और न ही कोई दूसरी सुरक्षा। यह पेंशन उनके लिए वही काम करती है जो संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उनकी पेंशन करती है।
समाज के लिए प्रेरणा
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण है। यह दिखाता है कि सरकार अगर चाहे तो मजदूर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। जब समाज के सबसे निचले तबके के लोगों का ख्याल रखा जाता है तो पूरा समाज मजबूत होता है। यह योजना लाखों मजदूर परिवारों के लिए आशा और विश्वास का स्रोत बन चुकी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ेगा और पेंशन की राशि में भी वृद्धि होगी ताकि मजदूरों को और बेहतर सहायता मिल सके।
महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। योजना की शर्तें, पेंशन राशि और अन्य नियम सरकारी निर्णयों के आधार पर बदल सकते हैं। सटीक और नवीनतम जानकारी के लिए कृपया छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें या नजदीकी श्रम कार्यालय से संपर्क करें।
